sehnai ek raaj batao tum kyon bajti ho
शहनाई इक राज बताओ तुम क्यों बजती हो
इक तो इन लड़के वालों की हंसी ठिठोली के स्वर
मेरे कानो से होकर दिल तक आकर कांटे बनकर चुभते हैं
इन स्वरों को संगीत देकर तुमने ही तो नाद बनाया
इस भाई के अधरों तक जो आंसू हैं
इनका तो सम्मान किया होता तुम क्यों हंसती हो
शहनाई इक राज बताओ तुम क्यों बजती हो।
पहले वो मम्मी मम्मी कहकर जब भी आवाज लगाती थी
सुनकर पुकार बिटिया की बिना चप्पल के माँ भी दौड़ी जाती थी
सुलाती गोद में उसको फिर प्यार से सहलाती थी
वह सम्बल देती थी माँ को, उसने उन सपनो को फिर से पर दिए थे
हाँ वही अधूरे सपने जो माँ ने जाने कब देखे थे
शायद वो खुद बिटिया थी तब देखे थे
अपनी पलकों पर रखकर वो सारे सपने फिर माँ की गोद में सर टिकाये
उनके आँचल को आकाश बनाकर, उसमे ही फिर उड़ती जाती
उड़ते उड़ते क्यों इतनी दूर चली आयी में कहकर पगली रो देती है
इधर धरा पर मम्मी भी अब अपना धीरज खो देती हे
एक सवाल तब पूछा था माँ के भीतर छिपी हुवी बेटी ने खुद से
वही सवाल शायद यह बिटिया भी पूछेगी इक दिन
कि जब में रोती हूँ तो मुझसे ज्यादा मेरी माँ कैसे रोती है
माँ-बेटी का संग बिटिया के यह जो करुण क्रंदन है
इनका तो सम्मान किया होता तुम क्यों हंसती हो
शहनाई इक राज बताओ तुम क्यों बजती हो
इक तो इन लड़के वालों की हंसी ठिठोली के स्वर
मेरे कानो से होकर दिल तक आकर कांटे बनकर चुभते हैं
इन स्वरों को संगीत देकर तुमने ही तो नाद बनाया
इस भाई के अधरों तक जो आंसू हैं
इनका तो सम्मान किया होता तुम क्यों हंसती हो
शहनाई इक राज बताओ तुम क्यों बजती हो।
पहले वो मम्मी मम्मी कहकर जब भी आवाज लगाती थी
सुनकर पुकार बिटिया की बिना चप्पल के माँ भी दौड़ी जाती थी
सुलाती गोद में उसको फिर प्यार से सहलाती थी
वह सम्बल देती थी माँ को, उसने उन सपनो को फिर से पर दिए थे
हाँ वही अधूरे सपने जो माँ ने जाने कब देखे थे
शायद वो खुद बिटिया थी तब देखे थे
अपनी पलकों पर रखकर वो सारे सपने फिर माँ की गोद में सर टिकाये
उनके आँचल को आकाश बनाकर, उसमे ही फिर उड़ती जाती
उड़ते उड़ते क्यों इतनी दूर चली आयी में कहकर पगली रो देती है
इधर धरा पर मम्मी भी अब अपना धीरज खो देती हे
एक सवाल तब पूछा था माँ के भीतर छिपी हुवी बेटी ने खुद से
वही सवाल शायद यह बिटिया भी पूछेगी इक दिन
कि जब में रोती हूँ तो मुझसे ज्यादा मेरी माँ कैसे रोती है
माँ-बेटी का संग बिटिया के यह जो करुण क्रंदन है
इनका तो सम्मान किया होता तुम क्यों हंसती हो
शहनाई इक राज बताओ तुम क्यों बजती हो
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