kya batayen kya milta he
इक नजर तुमको देखा था
अब तलक बस देख रहे हैं
हम तो पगली खुद पागल ठहरे
क्या बतायें क्या मिलता है
जिन पलकों ने एक अरसे से
शुष्क धरा पर फूल नहीं देखा
नूर बरसता देख तुम्हारा
अश्कों का झरना झरता है
अंखिया जो मेरी बगिया है
यहाँ नया स्वप्न खिलता है।
जाने वो स्वर कब सुना था
अब तलक वही सुनते है
अब तलक वही सुनते है
हम तो पगली खुद पागल ठहरे
क्या बतायें क्या मिलता है
यह दिल बेबस एक अरसे से
खुद से बातें कर नहीं पाता
स्वर तुम्हारे सुनकर पगली
अंदर एक कम्पन होता हे
वो रोता है फिर गाता है
दिल अपनी बात सुनाता है।
यह दिल बेबस एक अरसे से
खुद से बातें कर नहीं पाता
स्वर तुम्हारे सुनकर पगली
अंदर एक कम्पन होता हे
वो रोता है फिर गाता है
दिल अपनी बात सुनाता है।
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