ek do achhe sher

तुम्हारी पलकें जाने कब तक यूँ ही उदास बैठेगी 
हमसे खफा होने की सजा अपनी खूबसूरत अदाओं को न दो तुम। 

माफ़ कर दिया तुमने मुझे उस गलती पे 
शायद में खुद भी न कर पता खुद को जिस गलती पे 
सच बताना क्या सच्ची में तुम इतनी अच्छी हो 
या फिर तुम मुझे बेइन्तेहाँ प्यार करती हो। 

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