roj marta hun,wo julfein jinke neeche

वो ख्वाब जिसके भीतर देखा था तेरा चेहरा 

वो ख्वाब जीने खातिर अब रोज मरता हूँ।  

कहती है मुझको पागल 

क्या पागल हूँ में यारों 

जिसे भूल जाना था 

मैं उसको याद करता हूँ । 

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वो जुल्फें जिनके नीचे एक चंदा रहता था 

वो जुल्फों वाली छलनी से अब चाँद देखती होगी। 

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