छोटी छोटी नोक-झोंक और मीठी मीठी बातें हैं
सोच कर सारे मंजर शायद अब दोनों मुस्काते हैं
वक़्त के साथ भुला देंगे, भला ये भी क्या नासमझी थी
वक़्त के साथ यादों के बादल और गहराते जाते हैं।
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