mere sapno ka

मेरे सपनो का तो वही घर ठिकाना 
गुजरता है जहाँ से इक चाँद पुराना 
दर्शन को जिसके तरसी निगाहें 
क़यामत कहा था, क़यामत हो जाना। 

प्यार की चाँदनी में धागा पिरोने,
बहाने बनाना फिर छत पर जाना। ..... 


Comments