apradhi samaj
ये समाज एक अपराधी है
जिसको सब आदर्श बताते
गुनहगार की परछाई हे
सबको ऐसे मुर्ख बनाता
सबसे उनका गुनाह छिपाता
कालचक्र का खेल बताकर
चरित्रहीन को गले लगाता
जिनपे अत्याचार हुवे हैं
उनपे ही इल्जाम लगाता
खूब सताता और रुलाता
उनको सबसे दूर भगाता।
नहीं दिखाई देता इसको
नेत्र मिले पर अँधा होगा
बोलो अब तो चीखे गुंजी
गूंगा ठहरा बहरा होगा
स्मरण करो उस सभा में
पांचाली पर संकट आया
सारे योद्धा कायर बन गए
महाज्ञानी सब मौन खड़े थे
खैर वो तो ठहरे वचन के मारे
तुमने किसको वचन दिए हे
ईश्वर ने तब न्याय किया था
सबको अपना दंड मिला था
ईश्वर अब जब न्याय करेगा
तब देखेंगे क्या होता हे
ये समाज एक अपराधी हे।
Mudit sand
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