काँटें बन कर पलकों पे बैठी चुकी हसरतें तेरी
तेरी हसरतों से आगे की दुनिया में हे सपने मेरे
अब रो भी न सकता की अपनों को दर्द होता हे
खुद ही चला जा रहा बहुत दूर अब सपनो से मेरे।
तेरी हसरतों से आगे की दुनिया में हे सपने मेरे
अब रो भी न सकता की अपनों को दर्द होता हे
खुद ही चला जा रहा बहुत दूर अब सपनो से मेरे।
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