बहुत बड़े थे ढोंगी बाबा। 

आँखे मूँद कर ध्यान लगाते
भरे उदर में भरते जाते 
कुछ किताबे रटने भर से 
जिंदगी भर उपदेश सुनाते 
खुद की नैया डूब चुकी हे 
हमारी नैया पार लगवाते। 

हम ठहरे अज्ञानी प्राणी
बाबा तो ब्रह्माण्ड के ज्ञानी  
सबको अपना ज्ञान बाँटने 
मूर्खो में कुछ मुर्ख छांटने
हमको अपने पास बुलाते 
खुद को सबका गुरु बनाते। 

वो चिलाया मुझे बचाओ 
बाबा बोले पास आओ 
पैसे नहीं तो हवन कराओ 
नौकरी नहीं तो पैसे लाओ 
बीमार हो तो भोग लगाओ 
सच पूछा तो इसे भगाओ। 






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