Phulo ke bichur Jane pe
बाहों में तेरी आकर
बन फूल खिला करते है
काँटों से नजरे चुराकर
बगिया में मिला करते है ।
डाली की अंगुली थामे
हम प्यार किया करते है
काँटे तो फिर भी काँटे
वार किया करते है ।
फूलों के बिछुड़ जाने पर भी
काँटे तो चुभा करते है
फूल ना फिर पहले जैसी
खुशबू दिया करते हैं ।
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