Do Prani
दुनिया में दो प्राणी ऐसे
अदभुत अडिग सयाने जैसे।
एक अनंत इच्छाएं पाले
दूजा केवल स्वप्न सजा ले।
इसके तो सपने भी सीमित
लेकिन उसको इससे दिकत।
फिर आपस में लड़ते मिलते
चार आंखों में ग्लानि दिखती।
इसके सपने सध जाने में
उसको अपनी हानि दिखती।
अपनी बात मनवानी उसको
इसको केवल एक धुन गानी।
फिर तो फिर से वही नज़ारे
फिर से इसमें दोनों हारे।
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भोर हुवी हे जगते जगते
तर आंखों से पढ़ते पढ़ते
सपनो से अब नाराजी हे
नींद रुस्वाई उसके चलते।
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प्यार तड़पते देखा मेने
फिर सपनो के साये देखे
कुछ इच्छाएं मरती देखी
कईं अफ़साने जाये देखे।
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