कब से न जाने बात नहीं की  कोई बात नहीं जो तूने बात नहीं की 
बताना चाहता था एक बात मगर क्या हुवा जो तूने बात नहीं की 
तेरी नजरो को बस देखते देखते ही खो गया जो तूने बात नहीं की 
तेरा चेहरा चाँद से बेहतर हे ये मालूम हो गया जो तूने बात नहीं की 
तेरे लबों के मिठास में ही कहीं घुल सा गया जो तूने बात नहीं की 
तेरी बाहों में जन्नत का आभास सा हो गया जो तूने बात नहीं की 
तेरी इन काली जुल्फों की छाँव में ही सो गया जो तूने बात नहीं की 
तेरे दिल की गहराई में विश्वास सा हो गया जो तूने बात नहीं की 
और मेरे दिल से इश्क़ का इज़हार हो गया जो तूने बात नहीं की। 


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