kuch ek sher
jindagi haseen palo ko kho deti h
Masum he na isliye ro deti h
najro se meri wo aujhal huvi h
pata nhi kahan par wo kho si gayi h
जिंदगी जब हसीं पलों को खो देती हे
मासूम हे ना अक्सर यूँ ही रो देती हे।
नजरो से मेरी वो ओझल हुवी हे
मालूम नहीं कहाँ खो सी गयी हे।
जिंदगी जब हसीं पलों को खो देती हे
मासूम हे ना अक्सर यूँ ही रो देती हे।
नजरो से मेरी वो ओझल हुवी हे
मालूम नहीं कहाँ खो सी गयी हे।
Pyaar me Barbaad hote bhut apno ko dekha ab to pyaar se hi hamko nafrat ho gyi
पता नहीं मानता होगा या नहीं मानता होगा
प्यार सच्चा हे मेरा ये तो जरूर जानता होगा।
ये जो तेरे खेलो से अनजान हूँ
तो तुम समझती हो नादान हूँ
जान बूझकर जितने दे रहा तुझको
तेरी जीत से नहीं हार से परेशान हूँ
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ये भटकती निगाहैं, तड़पती बाहें और एक बेचैन दिल
न जाने और क्या क्या होगा, तू एक बार आके तो मिल।
--------
कुछ यादें धीरज खोती हे
कुछ यादें छुप छुप रोटी हे
मेने तो इंसा को इंसानियत की नजरो से देखा
बहुत मिले हे मासूम नजरो से नजरे चुराने वाले।
ये उदासियाँ बेचैनी और तड़प क्यों
जो वादे किये थे क्या निभा रही हो
नहीं तो वही वादे क्यों एक बार फिर
अपनी शादी में किये जा रही हो।
क्या मेरे इज़हार-ए -इश्क़ का ये भी अंजाम होगा
किसी दिन तुम्हारी जिंदगानी में हमारा नाम होगा।
बहुत एहतियात बरती हे कदम-ए-इश्क़ बढ़ाने में
भरोसा हे की तुम्हारी मंजिल ही हमारा मकाँ होगा।
तरस गए थे जिन चंद लफ्ज-ए-इश्क़ के लिए
सुना हे आज रात ही तुम्हारी जुबां से बयां होगा।
बह जाना हे अब इस लहर-ए-इश्क़ के संग
मुद्दतें बीत जाएगी और फिर जाके फना होगा।
कुछ कड़वे लोग सच्चे होते हे मगर
दुनिया में तो झूठे ही अच्छे होते हे
आसान नहीं होता सोने से घर भरना
तभी खोटे सिक्को के भी खर्चे होते हे।
tere palko se moti chun ke sajaya tha hamne
tere intezaar me ek samandar bahaya tha hamne
मेरी पलकों से मोती चुन के सजाया था
एक रोज इंतज़ार में समंदर बहाया था।
tumne mujhko baar baar inkaar kiya tha magar
nasamaj hu na har baar bas pyaar kiya tha
हर बार मेरे इजहार को इंकार किया
नासमझ हूँ ना फिर भी प्यार किया।
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अब जानती होगी या नहीं जानती होगी
प्यार सच्चा था यह तो मानती होगी।।
सपनो में आकर फिर औझल हुयी हे
कायनात में कहीं गुम सी गयी हे।।
कुछ यादें धीरज खो रही हैं
आँखें छूप छूप रो रही हे ।।
ये उदासियाँ बेचैनी और तड़प क्यों
जो वादे किये थे क्या निभा रही हो
नहीं तो फिर क्यों वही वादे एक बार
अपनी शादी में किये जा रही हो।
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कुछ यादें सहज आभास लिए
जब अम्बर के नीचे सोती हे
कुछ यादें एक विश्वास लिए
जब खड़ी सामने होती हे
कुछ यादें उस बैचैनी की
जब बातें उनसे होती हे
कुछ यादें मीठा सा दर्द लिए
जब दोस्त चिकोटी भरते हे
और उसकी बातें ही करते हे
कुछ यादें आँखों में चमक लिए
जब सपनो में आ जाती हे
कुछ यादें दिल पे वॉर लिए
जब आँखों से ओझल होती हे
कुछ यादें धीरज खो देती हे
और आँखें छुप छुप रो देती हे।।
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एक नयी सौगात आयी हे आज जश्न की रात आयी हे
मालूम हे मेरे हाथ नही आयी पर मेरी रूह के साथ आयी हे
फिर भी क्यों में मान नही पाता की मेरे पास ही आयी हे
मगर जमाना बता देता हे की तेरे ही साथ आयी हे।।
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तेरी ऊँचीं आवाजें बतला रही
हमे तुम्हारी जरुरत आ रही
जरुरत का पता नहीं मगर
ये आवाजें मेरी भूल बता रही।
तू जो बोल रहा मुझको जरुरत हे तेरी
जरुरत का तो पता नहीं मगर
ये तेरी आवाजें एक भूल हे मेरी।
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हवाओं की तरह बह रही हे
मेरे दिल के हर एक कोने में
बहुत सुकून मिलता हे
तेरे चलने भर से मगर
जिस दिन थम जाएगी
बस जिंदगी गुम जाएगी।
०-----------------------------
इस दोस्ती पे गुमान हे
सूरज के समान हे
अब वो रात आई हे
संग आंसू लायी हे
छीप गया मेरी नजरो से
और कहीं दूर गया होगा
वहां भी उजाला करने
आँखों में सपने भरने
सपनो को पूरा करने
मुझे भी भरोसा हे की
तुम फिर से आओगे
किसी नये सवेरे में
नयी रौशनी लाओगे।
---------
तेरा आना मुझे बुलाना फिर मुस्काना और इठलाना
मालुम हे की साजिश है, फिर भी चाहता हूँ फस जाना।
-------------------------------------------
मेरी साँसों पे कर्जा हे तेरे ही नाम का
जिस दिन मिट जायेगा उसी दिन फ़ना होंगे।
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ये जो चंद लोग इधर से उधर जा रहे हे
न जाने कौन इनको शरीफ बता रहे हे
मुझे तो अजीब लगता हे उनपे भी यकीन करना
जो कल इनपे ऊँगली उठाते थे
और आज उन्ही से हाथ मिला रहे हे।
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जंग जारी हे जीत की जीत पे भी जीत जाने को
अंदर ख्वाबों में जो अभिलाषा हे सच में बाहर हे
उसको बाहर से भीतर लाकर उसी में गुम हो जाने को
हर बार मेरे इजहार को इंकार किया
नासमझ हूँ ना फिर भी प्यार किया।
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अब जानती होगी या नहीं जानती होगी
प्यार सच्चा था यह तो मानती होगी।।
सपनो में आकर फिर औझल हुयी हे
कायनात में कहीं गुम सी गयी हे।।
कुछ यादें धीरज खो रही हैं
आँखें छूप छूप रो रही हे ।।
ये उदासियाँ बेचैनी और तड़प क्यों
जो वादे किये थे क्या निभा रही हो
नहीं तो फिर क्यों वही वादे एक बार
अपनी शादी में किये जा रही हो।
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कुछ यादें सहज आभास लिए
जब अम्बर के नीचे सोती हे
कुछ यादें एक विश्वास लिए
जब खड़ी सामने होती हे
कुछ यादें उस बैचैनी की
जब बातें उनसे होती हे
कुछ यादें मीठा सा दर्द लिए
जब दोस्त चिकोटी भरते हे
और उसकी बातें ही करते हे
कुछ यादें आँखों में चमक लिए
जब सपनो में आ जाती हे
कुछ यादें दिल पे वॉर लिए
जब आँखों से ओझल होती हे
कुछ यादें धीरज खो देती हे
और आँखें छुप छुप रो देती हे।।
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एक नयी सौगात आयी हे आज जश्न की रात आयी हे
मालूम हे मेरे हाथ नही आयी पर मेरी रूह के साथ आयी हे
फिर भी क्यों में मान नही पाता की मेरे पास ही आयी हे
मगर जमाना बता देता हे की तेरे ही साथ आयी हे।।
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तेरी ऊँचीं आवाजें बतला रही
हमे तुम्हारी जरुरत आ रही
जरुरत का पता नहीं मगर
ये आवाजें मेरी भूल बता रही।
तू जो बोल रहा मुझको जरुरत हे तेरी
जरुरत का तो पता नहीं मगर
ये तेरी आवाजें एक भूल हे मेरी।
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हवाओं की तरह बह रही हे
मेरे दिल के हर एक कोने में
बहुत सुकून मिलता हे
तेरे चलने भर से मगर
जिस दिन थम जाएगी
बस जिंदगी गुम जाएगी।
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इस दोस्ती पे गुमान हे
सूरज के समान हे
अब वो रात आई हे
संग आंसू लायी हे
छीप गया मेरी नजरो से
और कहीं दूर गया होगा
वहां भी उजाला करने
आँखों में सपने भरने
सपनो को पूरा करने
मुझे भी भरोसा हे की
तुम फिर से आओगे
किसी नये सवेरे में
नयी रौशनी लाओगे।
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तेरा आना मुझे बुलाना फिर मुस्काना और इठलाना
मालुम हे की साजिश है, फिर भी चाहता हूँ फस जाना।
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मेरी साँसों पे कर्जा हे तेरे ही नाम का
जिस दिन मिट जायेगा उसी दिन फ़ना होंगे।
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ये जो चंद लोग इधर से उधर जा रहे हे
न जाने कौन इनको शरीफ बता रहे हे
मुझे तो अजीब लगता हे उनपे भी यकीन करना
जो कल इनपे ऊँगली उठाते थे
और आज उन्ही से हाथ मिला रहे हे।
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जंग जारी हे जीत की जीत पे भी जीत जाने को
अंदर ख्वाबों में जो अभिलाषा हे सच में बाहर हे
उसको बाहर से भीतर लाकर उसी में गुम हो जाने को
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