Ya koi gulab haj

यह महकता बदन है या मेरे हाथ में कोई गुलाब है 
उन आंखों में वो काजल मेरी आंखो के ख्वाब हैं
इतने मौसम इतनी रातें आई फिर चली गई
हम न रुके किसी चांद की खातिर खैर तेरी और बात है।

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