जब सांसें साथ छोड़ रही हो
जब सांसें साथ छोड़ रही हो
इंसानियत कमरों में दम तोड़ रही हो
तब क्या करें बताओ
देखें, नजरे झुकायें और चलते बने
गिड़गिड़ायें या रोयें क्या करें
या बन जाएं बेशर्म
उन राजनेताओं की तरह
जो अनाचारियों की तरह
कालाबाज़ारी करने वालों की तरह,
नैतिकता का त्याग कर
मासूम बच्चों की आँखों से
टपकने वाले आंसुओं का घी बना
बाजार में व्यापार करने लगे हैं ,
क्या हम कर पाएंगे ये सब
हमसे तो नहीं होगा।
-Mudit sand
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