Kahan tak achha hai

 कहाँ तक अच्छा है, 

किसी की याद में आँसू बहाना

 सच को झुठ, झुठ को सच बतलाना

 बहलाना दिल को और यारों से नजरें चुराना

कहाँ तक अच्छा है, 

बाँह मे तकिये कि लिपट कर सो जाना।

सितम जो हम पर बरसे थे,

वो थे हवाओं के तेज झोंके,

इन तुफानो के मौसम में

कहाँ तक अच्छा है,

टहनियों का दरख्तों से दिल लगाना

कहाँ तक अच्छा है, 

किसी की याद में आँसू बहाना।।








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