aksar

हवा से हाथ मिला कर जलना 
दीये को काला कर देता है अक्सर। 

फरेब के साये में पलने वालों को पता नही है 
अपने से अपने को लूटते फिरते हैं अक्सर। 

जो जवाँ था वो अब कुछ भी नही है 
फिर भी आईने में घूरते रहते है अक्सर। 

इरादा तुम्हारा था तो खैर कोई बात नहीं 
वरना रिश्ते तो खून के भी बनते बिगड़ते रहते है अक्सर। 

सड़क किनारे एक बच्चा बड़ी उम्मीद से देख रहा था 
भूख इंसानों को भी ईश्वर कर देती है अक्सर। 

मालूम है मेरी बहन मुझे बहुत चाहती है 
खामखा परेशां भी तो करती है अक्सर। 

गुमसुम सा चेहरा है, मुदित तुम्हे हंसना नहीं आया  
रिमझिम संग खेलकर वो खिलखिलाते हैं अक्सर। 

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