Ye aakhiri saal| Last year of college

ये आखिरी साल यहाँ पे क्या क्या सीखा गया मुझको
मोहबत नफ़रत ज़िन्दगी मौत सब दिखा गया मुझको।

मिले  यहाँ कुछ लोगो से जिन्हे बेइन्तेहाँ चाहने लगे
हर दिन  संग दोस्तों के नयी महफ़िल सजाने लगे
दास्ताँ इस कदर रही की दिल जुड़ गए आपस में
ये मोहबत थी की दोस्त एक दूसरे को भाई बताने लगे।

यहाँ लोग अपनी अपनी जिद में आगे बढ़ते चले गए
किसी ने किसी को नहीं रोका और कटते  चले गए
फिर थोड़ी सी कड़वाहट और बाद में नफरत पनप गयी
एक दूसरे को न समझने की कोशिश में दोस्ती बिलख गयी।

जिंदगी में जरुरी हे जो बहुत कुछ यहाँ  सिखाया मुझको
जो चाहा हे  करना वो सब करने लायक बनाया मुझको
धैर्य भरोसा मेहनत लगन उम्मीद और न जाने क्या क्या
अंत तक जरुरी हे जीवन में  वो सब सिखाया मुझको।

वैसे तो मौत देखी नहीं इन आँखों ने कभी
मगर जब यादों को समेटकर निकलने लगे यहाँ से
आँखों से नीर निकलने लगा और एहसास हुवा की
एक ज़िन्दगी तो हम इधर ही लगा बैठे।

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