Tasveer
अपने जिन्हें अपना बताते हैं
उन्हें क्यों अपना मान पाते नही।
दिल की गहरायिओं में जिन्हें चाहते हे
जुबां से क्यों उन्हें बता पाते नही।
शुरुआत में हलकी सी आहट पर
जो तस्वीर छुपा लिया करते थे
माना की नादाँ थे उस वक़्त पर
आज भी क्यों वो तस्वीर बता पाते नही।
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