दिल अपनी बात करता है।

तन्हाई का मारा दिल हमारा 

भूल गया जो बातें सारी 

फिर से याद करता है 

इसी बहाने पेड़ के नीचे

टपरी के पीछे, जानेमन से 

दिल अपनी बात करता है। 



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