खलल पड़ी अब जिंदगी सुकून से जीने में
मोहब्बत कर आँखों के अश्को को पीने में
जमाना कहता फिरता रहता की ये सब धोखा हे
कब किसने नदी को समंदर में समाने से रोका हे।
मोहब्बत कर आँखों के अश्को को पीने में
जमाना कहता फिरता रहता की ये सब धोखा हे
कब किसने नदी को समंदर में समाने से रोका हे।
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